हर parent चाहता है कि उसका बच्चा खुश रहे। मुस्कुराए, खेले और अपनी life enjoy करे। लेकिन कभी कभी बच्चा बाहर से normal दिखता है पर अंदर से परेशान होता है। आज के time में बच्चों में stress और depression तेजी से बढ़ रहा है। इसे समझना और time पर help करना बहुत जरूरी है।
Depression को कैसे पहचानें
Depression हर बच्चे में अलग तरह से दिखता है। कुछ बच्चे चुप हो जाते हैं जबकि कुछ irritate करने लगते हैं। अगर बच्चा पहले जैसा नहीं है तो ध्यान देना चाहिए।
Behaviour में बदलाव
अगर आपका बच्चा पहले fun loving था और अब हमेशा sad या silent रहता है तो यह sign हो सकता है। वो अपने friends से दूर रहने लगा है या किसी से बात नहीं करना चाहता है। Activities जो उसे पहले पसंद थीं अब उनमें interest नहीं ले रहा है।
Sleep और Eating Pattern बदलना
बच्चा अगर बहुत ज्यादा सोने लगा है या बहुत कम सोता है तो ये भी depression का संकेत हो सकता है। Eating habits में भी बदलाव दिख सकता है। कभी खाना ज्यादा खाता है कभी बिल्कुल नहीं।
School Performance पर असर
Depression का असर studies पर भी पड़ता है। Grades गिरने लगते हैं, concentration कम हो जाता है। Teacher अगर कहे कि बच्चा class में dull या distracted है तो इसे lightly न लें।
Physical Complaints
कई बार बच्चे बार बार कहते हैं कि सिर दर्द है या पेट दर्द है जबकि कोई medical reason नहीं होता। ये body का signal हो सकता है कि बच्चा emotionally disturbed है।
Communication बहुत जरूरी है
बच्चे से बात करें। उसे सुनें। उसे लगे कि वह अपनी feelings share कर सकता है। डर या guilt का माहौल न बनाएं। बस calmly बात करें। अगर जरूरत लगे तो child psychologist या counsellor से help लें।
Parents क्या कर सकते हैं
हर बच्चे को support चाहिए। उसकी छोटी बातों को ignore मत करें। Family time बढ़ाएं। बाहर घूमने ले जाएं। उसकी favourite activities में साथ दें। सबसे जरूरी बात यह है कि उसे प्यार और trust का एहसास दिलाएं।
अंत में
Depression कोई weakness नहीं है। यह एक condition है जिसे समझना और heal करना जरूरी है।
Parents अगर time पर ध्यान दें तो बच्चा जल्दी recover कर सकता है और फिर से खुश रह सकता है।
If you write about family care, parenting and emotional wellbeing then Write For Us Lifestyle Guest Post is the perfect place to share your thoughts and experiences with others